उज्जैन। विश्वप्रसिद्ध बाबा महाकाल के दरबार में रक्षाबंधन का महापर्व श्रद्धा, आस्था और धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया गया। रक्षाबंधन के अवसर पर पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई करीब 2 फीट लंबी राखी भगवान महाकाल को अर्पित की गई। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तिभाव और उत्साह का माहौल देखने को मिला। बाबा महाकाल को राखी अर्पित करने की यह परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

रक्षाबंधन के साथ ही आज सावन माह का अंतिम दिन होने के कारण बाबा महाकाल के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। सुबह से ही महाकाल मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की। सावन के अंतिम दिन मंदिर में धार्मिक आयोजनों के चलते वातावरण पूरी तरह शिवमय नजर आया।

बाबा महाकाल को अर्पित की गई विशेष राखी

रक्षाबंधन के अवसर पर बाबा महाकाल के लिए पुजारी परिवार की महिलाओं ने विशेष राखी तैयार की। करीब 2 फीट लंबी इस राखी को विधि-विधान और श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल को अर्पित किया गया। भगवान को भाई के रूप में मानकर राखी अर्पित करने की यह धार्मिक परंपरा भक्तों की आस्था से जुड़ी हुई है।

राखी अर्पित किए जाने के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने भी इस धार्मिक आयोजन के दर्शन किए। विशाल आकार की आकर्षक राखी को देखने के लिए भक्तों में उत्सुकता दिखाई दी। मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुसार रक्षाबंधन के पर्व पर बाबा महाकाल को राखी अर्पित करना इस उत्सव को और भी विशेष बना देता है।

सावन के आखिरी दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

सावन माह भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन के अंतिम दिन महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में खासा इजाफा देखने को मिला। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ जलाभिषेक और पूजन कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा।

सावन के पूरे महीने महाकाल मंदिर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों का सिलसिला चलता रहा। सावन के अंतिम दिन इन आयोजनों का विशेष धार्मिक महत्व रहा। रक्षाबंधन और सावन के समापन का संयोग होने से मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह दोनों चरम पर नजर आए।

सवा लाख लड्डुओं का लगाया गया महाभोग

सावन के अंतिम दिन बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इतने बड़े स्तर पर तैयार किए गए लड्डुओं का भोग भगवान महाकाल को समर्पित किया गया। महाभोग के आयोजन को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा।

धार्मिक मान्यता और परंपराओं के अनुसार भगवान को भोग अर्पित करना पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। महाकाल मंदिर में विशेष अवसरों पर अलग-अलग प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं। सावन के अंतिम दिन सवा लाख लड्डुओं का महाभोग भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा रहा। भगवान महाकाल को भोग अर्पित किए जाने के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद का विशेष महत्व रहा।

महाकाल मंदिर से शुरू होती हैं हिंदू त्योहारों की परंपराएं

उज्जैन का महाकाल मंदिर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी विशेष पहचान रखता है। श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है कि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों और धार्मिक पर्वों की शुरुआत बाबा महाकाल के दरबार से होती है। इसी परंपरा के तहत रक्षाबंधन के अवसर पर भी बाबा महाकाल को सबसे पहले राखी अर्पित की गई।

रक्षाबंधन के इस आयोजन ने महाकाल की नगरी में पर्व के उत्साह को और बढ़ा दिया। एक ओर जहां देशभर में भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व मनाया गया, वहीं उज्जैन में भगवान महाकाल को राखी अर्पित कर धार्मिक परंपरा निभाई गई। इससे मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर और भी भावनात्मक एवं आध्यात्मिक बन गया।

सावन के अंतिम दिन उमड़ी भीड़, बाबा महाकाल को अर्पित की गई 2 फीट की राखी और सवा लाख लड्डुओं के महाभोग ने महाकाल मंदिर में रक्षाबंधन और सावन के समापन को यादगार बना दिया। दिनभर मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालु बाबा महाकाल की भक्ति में लीन नजर आए।